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पत्थलगांव में नवरात्र की धूम: पंडालों में मां दुर्गा के दर्शन करने पहुंच रहे श्रद्धालु

पत्थलगांव। शारदीय नवरात्र पर्व की शुरुआत के साथ ही पूरे  पत्थलगांव सहित आसपास के क्षेत्र में श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना हुआ है। सोमवार से शुरू हुए इस पावन पर्व पर भक्तों ने मंदिरों और पूजा पंडालों में पहुंचकर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना शुरू कर रहे है।  विभिन्न स्थानों में विराजित माता के भंडारे  एवं प्रसाद ग्रहण करने भक्तजन दोपहर शाम रात को  पंडालों में पहुंच रहे है ।गुरुवार के दिन नवरात्र का चौथा दिन है। नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्माण्डा की पूजा की जाती है। अपनी मंद हंसी से ब्रह्माण्ड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कुष्माण्डा के नाम से जाना जाता है। संस्कृत भाषा में कुष्माण्डा कुम्हड़े को कहा जाता है और कुम्हड़े की बलि इन्हें बहुत प्रिय है, जिसके कारण भी इन्हें कुष्माण्डा के नाम से जाना जाता है। माता का वाहन सिंह है। मां कुष्माण्डा की आठ भुजायें होने के कारण इन्हें अष्टभुजा वाली भी कहा जाता है। इनके सात हाथों में कमण्डल, धनुष, बाण, कमल, अमृत से भरा कलश, चक्र तथा गदा नजर आता है तो आठवें हाथ में जप की माला। कहते हैं इस जप की माला में सभी सिद्धियों और निधियों का संग्रह है।

जशपुर रोड  बाजार पारा में  नगर के प्रख्यात विद्वान पंडित भक्ता महाराज जी  एवं  जजमान   जितेंद्र दबंग के द्वारा पूरे  विधि विधान से पूजा कराई जा रही है उन्होंने  ने जानकारी देते हुए   बताया कि:

जशपुर रोड स्थित विराजित माता

कुष्माण्डा देवी थोड़ी-सी सेवा और भक्ति से ही प्रसन्न हो जाती हैं। जो साधक सच्चे मन से इनकी शरण में आता है उसे आसानी से परम पद की प्राप्ति हो जाती है। मां कुष्माण्डा को लाल रंग के फूल पसंद हैं। साथ ही परिवार में खुशहाली के लिये, अच्छे स्वास्थ्य के लिये और यश, बल तथा लंबी उम्र की प्राप्ति के लिये आज के दिन मां कुष्माण्डा की पूजा के साथ भजन, कीर्तन, कथा और मंत्रों का जप किया जाता है।

माता कुष्मांडा का प्रिय भोग:

माता कुष्मांडा की पूजा नवरात्रि के चौथे दिन की जाती है। इस दिन माता की विधिवत पूजा के साथ ही उनका प्रिय भोग भी भक्तों को अर्पित करना चाहिए। माता कुष्मांडा को मालपुआ अतिप्रिय है इसलिए मालपुए का भोग इस दिन माता को लगाना चाहिए। इसके साथ ही दही और हलवे का भोग भी माता को लगा सकते हैं।

माता कुष्मांडा का प्रिय रंग :

माता कुष्मांडा को हरा रंग अतिप्रिय है, इसलिए भक्तों को नवरात्रि के चौथे दिन हरे रंग के कपड़े पहनने चाहिए। इस दिन हरे रंग के कपड़े और अन्न का दान करने से भी माता का आशीर्वाद आपका प्राप्त होता है

समिति के सदस्य डब्बू बंसल ने कहा कि इस बार बाहर से आए कारीगरी के द्वारा बहुत ही मनमोहक पंडाल सजाया गया है ,पूरी थीम बॉस शिल्प का नमूना पेश कर रही है, लेकिन इस बार बारिश एवं बिजली कटौती  से कई दिक्कत हो रही जो हमारे सजावट में बाधक बन रहा  है।

भंडारा में हाथ  बांटते  सुनील अग्रवाल

समिति के सुनील ताराचंदअग्रवाल ने बताया कि  प्रतिदिन माता रानी के भंडारे भक्तों के द्वारा लगाए जा रहे है,पूरा मोहल्ला एवं समिति सदस्य तन मन धन से सहयोग भी  कर रहे है ,पूरे नगर में सबसे ज्यादा  भीड़ भाड़ जशपुर रोड में रहती है शाम को पूरा माहौल मेला में तब्दील हो जाता है जिसकी छटा देखते भी बनती है

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