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नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की गई

पत्थलगांव।

पत्थगांव इस समय नवरात्रि  के धूम में पूरा  शहर जगमग हो उठा है । विभिन्न जगहों  में  सात जगहों पर एवं  साथ ही सबसे पुराने नगर के बड़े मंदिर एवं शारदा मंदिर  में भी माता की पूजा अर्चना की जा रही है । विराजमान मां जगत जननी की पूरे विधि विधान से पूजा आराधना की जा रही है। सुबह शाम के दौरान होने वाली आरती में भक्तों की भीड़ देखी जा रही है। सुबह शाम की आरती के दौरान पंडाल भक्तों से खचाखच भरा दिख रहा है।

भक्त माता के दरबार में प्रत्येक दिन उनके प्रिय भोग भी लगा रहे हैं। शहर में विराजमान सातों जगह की मां जगत जननी का पंडाल भव्य एवं आकर्षक रूप से सजाया गया है। कलकत्ता से आये कलाकारों द्वारा मां जगत जननी का पंडाल भव्य रूप से बनाया गया है। अंबिकापुर रोड दुर्गा मंदिर में विराजमान मां जगत जननी की भव्यता देखते ही बन रही है। भक्त स्वतः जगत जननी के पंडाल की ओर खिंचे चले आ रहे हैं। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी इस पंडाल को बेहद ही आकर्षक रूप से सजाया गया है। दुर्गा मंदिर के प्रमुख ज्योतिष पं. शिवनिवास उर्मलिया ने बताया कि नवरात्रि का तीसरे  दिन देवी चंद्रघंटा  को समर्पित है। इस दिन माता चंद्रघंटा की पूजा की जाती है,

माँ चंद्रघंटा की ऊर्जा आराधना से परिपूर्ण है: माँ चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत सौम्यता और शांति से परिपूर्ण है, लेकिन युद्ध के लिए उद्यत रहने की मुद्रा में हैं। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, जो उन्हें चंद्रघंटा नाम देता है।माँ चंद्रघंटा की आराधना से भक्तों को वीरता, निर्भयता और सौम्यता की प्राप्ति होती है। इससे जीवन में संतुलन, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है।माँ चंद्रघंटा की पूजा के लिए विशेष मंत्र हैं, जैसे कि “या देवी सर्वभूतेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।” उनकी पूजा में नारंगी रंग के वस्त्र और सुगंधित फूलों का उपयोग करना चाहिए।माँ चंद्रघंटा की आराधना से भक्तों को शक्ति और साहस की प्राप्ति होती है, जिससे वे जीवन की चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। माँ चंद्रघंटा की आराधना करने से भक्तों के शरीर से दिव्य प्रकाशमान परमाणुओं का अदृश्य विकिरण होता है, जो उनकी आध्यात्मिक उन्नति को दर्शाता है।

इस दिन मां को लाल फूल, चंदन और लाल चुनरी समर्पित करें एवं मां चंद्रघंटा को दूध या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाना चाहिए। मां को भोग में दूध और दूध से बनी चीजें विशेष प्रिय हैं।

उदयपुर राजस्थान से आए साहिल वर्मा,गोहाना से आए यतीश बेदी , कोमल बेदी जो कि शेखर रोहिला के रिश्तेदार है  ने  बताया कि हम हर वर्ष पत्थलगांव की दुर्गा पूजा देखने आते है है लोगो को पुरे साल भर इस दुर्गा पूजा का इंतजार रहता है यह की दुर्गा पूजा के समय जो एक बार आ जाता है वो बार बार आता है, यहां बहुत ही आनंद आता है, विदित हो कि यहां दुर्गा पूजा की धूम जबरदस्त रहती है खासकर विसर्जन का दृश्य तो अपने आप में मिशाल रहता है। रायगढ़ से आए पीयूष अग्रवाल ने बताया कि मैं बहुत छोटे से पत्थलगांव की दुर्गा पूजा में आता हु मुझे  यहां आकर अलग ही अनुभूति होती है एवं  मेरे कई दोस्तों से मिलकर एकदम अपना पन  लगता है  यहां का दुर्गा विसर्जन तो एकदम खास ,सभी समिति के सदस्य अलग अलग ड्रेस कोड में नजर आते है।जिसे देखकर काफी अच्छा लगता है।

समिति के सदस्य कल्लू,प्रवीण बंसल,शेखर एवं  उदयपुर से आए  साहिल वर्मा

दुर्गा मंदिर समिति के कल्लू अग्रवाल ने बताया कि वैसे तो  दुर्गा पूजा के लिए महीने भर पहले से  ही पूरी रूपरेखा  बनाया जाता है टेंट , लाइट ,चंदा कलेक्शन से लेकर कई कार्य  पहले शुरू हो जाते है ,है उसके बाद  नवरात्रि में पूरे नौ दिन  तो सभी सदस्य माता की सेवा में दिनरात लगे रहते है

मोहल्ले की महिलाएं प्रतिदिन  दिन में  माता के भजन कीर्तन कर रही है

भजन करती भक्त

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