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कार्तिक पूर्णिमा: दीपदान से जगमगाए तालाबों के घाट

कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर बुधवार की भोर से ही क्षेत्र में आस्था का समुंदर उमड़ पड़ा। सुबह तीन बजे से ही श्रद्धालु पुरुष और महिलाएं ब्रह्ममुहूर्त में उठकर कार्तिक स्नान के लिए निकले। हर तालाब, नदी और घाट पर “हरे राम, हरे कृष्ण” और “हर हर गंगे” की गूंज से वातावरण भक्तिमय हो उठा। स्नान के बाद भक्त अपने-अपने घरों में तुलसी के पौधे के नीचे दीप प्रज्वलित कर कार्तिक पुराण का श्रवण करते रहे। पूरे माह श्रद्धालुओं ने ब्रह्ममुहूर्त में स्नान, उपवास और पूजा-अर्चना की परंपरा निभाई।

कार्तिक व्रत में भक्तजन पूरे माह अत्यंत सादगीपूर्ण जीवन व्यतीत करते हैं। वे केवल एक बार भोजन करते हैं और तेल का पूर्ण त्याग रखते हैं। भोजन प्रायः उबालकर या कच्चा तैयार किया जाता है, यदि

कार्तिक पूर्णिमा पर किया गया दीपदान

आवश्यकता पड़े तो केवल घी का प्रयोग किया जाता है। इस संयम और पवित्रता के कारण पूरे क्षेत्र में धार्मिक अनुशासन और भक्ति का माहौल बना रहा। कई भक्तों ने पूरे माह व्रत किया, जबकि कुछ ने अंतिम सात दिनों तक विशेष कार्तिक स्नान किया। जो लोग पूरे

माह नियमपूर्वक व्रत नहीं रख सके, उन्होंने पूर्णिमा के दिन विशेष स्नान और दीपदान कर धर्मपालन किया। कार्तिक पूर्णिमा की रात्रि को किलकिल  नदी में एवं आसपास क्षेत्र के तालाबों में दीपदान का दृश्य अत्यंत मनमोहक रहा। सैकड़ों दीपों से तालाबों का जल सोने की तरह चमक रहा था।

श्रद्धालुओं ने सरई के दोने में आस्था के दीपक जलाए

श्रद्धालुओं ने सरई के दोने में दीप जलाकर प्रवाहित किए। कुछ भक्तों ने केले और सन के डंठलों से मंदिरनुमा दीप पात्र बनाकर जल में छोड़े, जिससे तालाब का दृश्य मनोहारी बन गया। तालाबों के चारों ओर भक्त परिवारों की भीड़ और बच्चों की खुशी ने दीपदान महोत्सव को मेला जैसी भावना दे दी। इस अवसर पर श्रद्धालु प्रमुख धार्मिक स्थलों कोतेईबिरा धाम, कपाटद्वार और झारखंड स्थित रामरेखा धाम पहुंचे। वहां उन्होंने भगवान राधा-कृष्ण और भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना की। जगह-जगह भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण के आयोजन हुए, जिससे पूरा इलाका आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया। पूरा कार्तिक माह क्षेत्र में भक्ति, सेवा और स‌द्भाव का प्रतीक

कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर बुधवार की भोर से ही क्षेत्र में आस्था का समुंदर उमड़ पड़ा। सुबह तीन बजे से ही श्रद्धालु पुरुष और महिलाएं ब्रह्ममुहूर्त में उठकर कार्तिक स्नान के लिए निकले। हर तालाब, नदी और घाट पर “हरे राम, हरे कृष्ण” और “हर हर गंगे” की गूंज से वातावरण भक्तिमय हो उठा। स्नान के बाद भक्त अपने-अपने घरों में तुलसी के पौधे के नीचे दीप प्रज्वलित कर कार्तिक पुराण का श्रवण करते रहे। पूरे माह श्रद्धालुओं ने ब्रह्ममुहूर्त में स्नान, उपवास और पूजा-अर्चना की परंपरा निभाई।

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