नवरात्रि पर्व पर:ठाकुर शोभासिंह कालोनी स्थित प्रजापिता ब्रम्हकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के द्वारा बनाई गई चैतन्य देवियों की झांकी,

पत्थलगांव । नवरात्रि पर प्रजापिता ब्रम्हकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित चैतन्य देवियों की झांकियां लोगों की श्रद्धा का केंद्र बन गई हैं। प्रतिदिन भारी संख्या में लोगों की भीड़ चैतन्य देवियों को देखने के लिए संस्थान के रायगढ़ रोड स्थित ठाकुर शोभासिंह कालोनी में स्थित केंद्र पर पहुंच रही है। जो शाम को6 बजे से रात्रि 10 बजे तक रहती है।

प्रजापिता ब्रम्हकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के द्वारा किये गए आयोजनमें चैतन्य देवियों की झांकी एवं 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए उमड़ रहे श्रद्धालु से शहर के साथ ही आसपास के गाँव गाँव मे लोगों के लिएआस्था का केंद्र बना हुआ है। शहर एवं आस-पास के क्षेत्रोंसे बड़ी संख्या में लोग इस संस्थान से जुड़े हुए हैं और यहांहोने वाली धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिलहोते हैं। संस्थान के द्वारा प्रतिवर्ष अलग अलग अवसरों पर संस्थान की परंपराओं के अनुरूप कार्यक्रमों का आयोजनकिया जाता रहा है। नवरात्र के मौके पर चैतन्य देवियों कीझांकियां इनमें प्रमुख है। इसमें ब्रम्हकुमारी बहनों के द्वाराअपनी योग शक्ति के बल पर माता शक्ति के विभिन्न रूपोंको धारण किया जाता है।
ब्रम्हकुमारी बहनें अपनी योगशक्ति के बल पर अपने शरीर को पूरी तरह स्थिर कर लेतीहैं। नवरात्र के दौरान माता की प्रतिमा की स्थापना करउनकी आराधना करना भारतीय संस्कृति की पुरातन परंपराहै। शहर एवं आस – पास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पूजापण्डालों में माता की नयनाभिराम प्रतिमाओं की स्थापनाकर उनकी पूजा अर्चना की जाती है। ऐसे में चैतन्य देवियोंकी स्थापना लोगों के लिए नवीनतम और आलौकिकअनुभव है। चैतन्य देवियों का दर्शन लाभ लेने के लिए लोगोंकी भारी भीड़ रायगढ़ रोड स्थित केंद्र पे उमड़ रही है।

संस्थान की संचालिका नीलू बहन ने बताया कि चैतन्य देवियों की झांकियों का आयोजन 22 सिंतबर को नवरात्र के साथ ही प्रारंभ हो चुका है और पूरे नवरात्र के सभी दिनों में सायं 6 बजे से रात्रि 10 बजे तक इसका नियमित रूप से आयोजन किया जाता रहेगा। उन्होंने बताया कि नवरात्र के मौके पर चैतन्य देवियों की झांकियों के साथ ही केंद्र पर बारह ज्योतिर्लिंगों की स्थापना भी की गई है।
श्रद्धालुगण एक साथ सभी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित कर सकते हैं।
अज्ञान का प्रतीक है कुंभकर्ण

वहीं केंद्र पर यंत्र चालित कुंभकर्ण की प्रतिमा भी लगाई गई है। जो कि अज्ञान की नींद में सोए हुए मस्तिष्क का प्रतीक है। इसे जगाने के लिए इलेक्ट्रानिक विधि के साथ ही लाइट और साउण्ड का समायोजन भी किया गया है। नीलू बहन ने बताया कि आधुनिक होने के बावजूद आज का मानव मन भी कुंभकर्ण की भांति नाना प्रकार की भ्रांतियों से जकड़ा हुआ है। कुंभकर्ण की प्रतिमा को जगाने की प्रक्रिया के माध्यम से अज्ञान के अंधकार में डूबे लोगों को ज्ञान के प्रकाश से आलोकित करने का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया गया ।जो लोगों के लिए कौतूहल का विषय बनी हुई है।



