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भक्तों को मोर छड़ी का झाड़ा लगाते हुए निकली खाटु नरेश की निशान यात्रा

पत्थलगांव. शहर में गुरुवार शाम खाटु नरेश श्याम बाबा की भव्य निशान यात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर आस्था का अद्भुत प्रदर्शन किया। अंबिकापुर रोड स्थित दुर्गा मंदिर से शाम 5 बजे शुरू हुई यात्रा में महिलाएं, पुरुष, बच्चे और बालिकाएं एक जैसी वेशभूषा वेशभ में निशान थामे शामिल हुए। पूरे मार्ग में जय श्री श्याम के जयकारों से माहौल भक्तिमय बना रहा।

निशान यात्रा के दौरान भक्तों ने मोरछड़ी का झाड़ा लगवाकर अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की कामना

निशान यात्रा में शामिल श्रद्धालु।

की। सूरजगढ़ राजस्थान से आए ध्वज संरक्षक हजारीलाल इंदौरिया महाराज की उपस्थिति में श्रद्धालुओं ने

विशेष श्रद्धा के साथ यह अनुष्ठान किया।

पर निकली यात्रा शहर के तीन प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी और देर रात श्री श्याम मंदिर पहुंचकर सम्पन्न हुई। यहां श्रद्धालुओं के लिए श्याम रसोई में प्रसाद एवं विभिन्न व्यंजनों की व्यवस्था की गई थी। श्याम सेवा समिति के अध्यक्ष सुशील अग्रवाल के नेतृत्व में आयोजित इस चतुर्थ वार्षिक उत्सव में महेंद्र अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, पप्पल गोयल सहित सदस्यों ने व्यवस्थाओं में अनेक सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। निशान यात्रा के लिए शहर के अलावा आस पास क्षेत्र के भी श्याम प्रेमी यहा पहुंचे हुए थे। तीनो मार्गों का निशान यात्रा ने भ्रमण किया, जय श्री श्याम के नारे देर रात तक कानो मे सुनाई देते रहे।

डीजे और ढोल-नगाड़ों की धुन

श्री श्याम मंदिर मे निशान यात्रा ने विश्राम लिया, जहा श्याम रसोई में श्रद्धालुओं ने लजीज पकवान का लुफ्त उठाया।

देर रात तक झूमते रहे श्रद्धालु

सूरजगढ राजस्थान से आए ध्वज वाहक भक्त हजारीलाल के भजनो ने भक्तो को तालियां बजाकर नाचने पर मजबूर कर दिया। उनके साथ सूरजगढ़ के भजन गायक भी यहां आए हुए थे। भक्त हजारी लाल ने भी अपने भजनो में मोर छड़ी का झाड़ा तू लगवा के देख ले, सूरजगढ निशान में तू जाके देख ले, जैसे सुप्रसिद्ध भजनो

निशान का महत्व

निशान का महत्व. खाटु नरेश श्याम की अराधना निशान चढ़ाये बगैर अधूरी मानी जाती है। मन्नतो पर श्याम कृपा बरसाने के लिए खाटु नरेश के दरबार मे निशान चढाना आवश्यक होता है। राजस्थान सूरजगढ से आए प्रथम ध्वज के सरंक्षक हजारीलाल इंदौरिया महाराज ने बताया कि सनातन संस्कृति में ध्वज को विजय का प्रतीक माना जाता है। श्री श्याम बाबा के महाबलिदान शीश दान के

से भक्तो का मन मोह लिया। देर रात तक श्याम मंदिर मे सांवरे के उत्सव की धूम देखने को मिली। कोलकाता,

लिए उन्हें निशान चढ़ाया जाता है, जिसमे उन्होंने धर्म की जीत के लिए दान में अपना शीश भगवान श्री कृष्ण को दे दिया था। उनका कहना था कि खाटु नरेश के दर्शन से पूर्व सूरजगढ से निशान चढ़ाने की 379 साल पुरानी परंपरा का आज भी भलीभांति निर्वहन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि फाल्गुन की बारस को मंदिर के शिखर पर सूरजगढ का ध्वज प्रतिवर्ष चढाया जाता है।

मुंबई जैसे बडे महानगरों से पहुंचे कलाकारो ने श्याम भजनो की एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी।

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