भगवान गिरधर को भोग लगाया भक्तों को अन्नकूट का प्रसाद बांटा गया, इस वर्ष दुर्गा मंदिर में शाम से लेकर रात तक वितरित किया गया अन्नकूट का महाप्रसाद,,,

पत्थलगांव
गोवर्धन पूजा – प्रकृति और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति कृतज्ञता का पर्व गोवर्धनपूजा, दिवाली के अगले दिन मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है। यह पर्व कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है।

इस पर्व के पीछे भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा है। पुराणों के अनुसार, गोकुल के लोग भगवान इंद्र की पूजा किया करते थे, ताकि उन्हें अच्छी वर्षा और भरपूर फसल मिल सके। लेकिन बालक कृष्ण ने उनसे कहा कि हमें वर्षा या फसल के लिए इंद्र नहीं, बल्कि गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए, क्योंकि वही हमें घास, अन्न, फल, फूल और जल जैसी जीवन की आवश्यक वस्तुएं प्रदान करता है।

इंद्र ने कृष्ण की बात सुनकर गोकुलवासी इंद्र की बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा करने लगे। इससे क्रोधित होकर इंद्र गोकुल पर लगातार सात दिन तक मूसलाधार वर्षा कर दी। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपने छोटे अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और सभी लोगों तथा गौधन को उसके नीचे शरण दी।

सात दिन तक लगातार वर्षा होती रही, लेकिन गोकुल का कोई भी जीव-जन्तु या व्यक्ति हानि नहीं पहुँचा। अंत में इंद्र ने अपनी गलती स्वीकार की और श्रीकृष्ण से क्षमा मांगी।
यह कथा हमें अहंकार छोड़कर विनम्रता और प्रकृती के प्रति श्रद्धा का संदेश देती है। गोवर्धन पूजा का मुख्यउद्देश्य प्रकृक्ति, पशु-पक्षी, गौधन और धरती माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है।
इस दिन भक्त लोग घरों में विविध प्रकार के शाकाहारी व्यंजन और मिठाइयाँ बनाते हैं, जिन्हें मिलाकर ‘अन्नकूट’ (अन्न का पहाड़) तैयार किया जाता है। इसे भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित
किया जाता है। पूजा के बाद यह अन्नकूट भक्तों में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।

आज के दिन हजारों श्रद्धालु गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करते हैं, जो लगभग 21 किलोमीटर लंबी होती है। भक्त जन इस दिन भजन-कीर्तन, हवन और दीपदान करते हैं।
घर और मंदिरों में गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत का प्रतीकात्मक स्वरूप बनाकर उसकी पूजा की जाती है। इसे फूलों, दीपों और मिठाइयों से सजाय जाता है।
गोवर्धन पर्वत को उंगली पर उठाकर गोकुलवासियों की रक्षा करने वाले भगवान गिरधर के भोग के साथ आज सत्यनारायण मंदिर में अन्नकूट का प्रसाद हजारों श्रद्धालुओं को वितरित किया गया। यह पर्व हर वर्ष दीपावली के दूसरे दिन धूमधाम से मनाया जाता है। इस बार अमावस्या के कारण गोवर्धन पूजा का आयोजन बुधवार को किया गया। सत्यनारायण मंदिर में सुबह से धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। भगवान गिरधर को भोग लगाकर भंडारा लगाया गया। इसी तरह दुर्गा मंदिर, शारदा मंदिर और किलकिलेश्वर धाम में भी अन्नकूट का प्रसाद वितरित किया गया।

आयोजन में शहरवासियों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

सत्यनारायण मंदिर में पिछले पांच दशक से दीपावली के बाद अन्नकूट का आयोजन किया जाता है। मंदिर समिति के सदस्यों ने आयोजन की पूरी तैयारी की थी। प्रसाद बनाने से लेकर वितरण तक
सभी समाज के लोग अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। सत्यनारायण मंदिर समिति के प्रमुख सदस्य मुकेश रामलाल,आलोक गर्ग,राकेश जिंदल, चमरू , डॉ पंकज, चमरू , रमेश जायसवाल आदि ने बताया कि आयोजन में आसपास की ग्राम पंचायतों के साथ सभी धर्मों के लोग एक कतार में खड़े होकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। पंचमेला का व्यंजन लोगों को विशेष रूप से पसंद आता है।
इसी तरह इस वर्ष शहर के प्रमुख दुर्गा मंदिर में शाम को अन्नकूट का प्रसाद का वितरण किया गया जिसमें भारी संख्या श्रद्धालु महिलाएं पुरुषों ने अन्नकूट का प्रसाद श्रद्धाभाव से ग्रहण किया समिति के सदस्य कल्लू एवं मधुसूदन ने बताया कि अन्नकूट के प्रसाद में कड़ी चावल एवं हरी मूंग दाल का भोग भगवान गोवर्धन को विशेष रूप से लगाया जाता है एवं भोग लगाने के बाद सभी भक्तों में वितरित किया जाता है एवं भक्तजन बैठकें प्रसाद ग्रहण कर अपने को पुण्य के भागी समझते है ।




